"आयुर्वेद दवाइयों
का नहीं बल्कि जीवन का विज्ञान है. ये एकमात्र पुरातन उपचार पद्धति है जो इंसान
के तन के साथ-साथ उसके मन का भी उपचार
करती है.
संस्कृत का एक श्लोक है
जो कहता है - नास्ति मूलमअनौषधम - मतलब ऐसी कोई जड़ या वनस्पति नही है जिसका कोई
औषधीय उपयोग न हो."
उच्च रक्तचाप, अवसाद, मधुमेह, यौन रोग, जठरशोथ, त्वचा रोग आदि इन रोगों को कुछ लंबे समय तक इलाज की आवश्यकता होती है और
अग्रेंजी दवाईयों से इन रोगो का ईलाज तो संभव है लेकिन उसके साइड इफ्केट भी बहुत
है.इसलिए लोग ज्यादा सुरक्षित आयुर्वेद के इलाज को मानने लगे है. आयुर्वेदिक उपचार
आम-आदमी की जरूरत के बजट में असली दवाओं को उपलब्ध करवाती है.
यह एक सुखद बात है कि आज
विश्व में लोग आयुर्वेद के प्रति ज्यादा आर्कष्ति हो रहे है क्योंकि श्रेष्ठ जीवन-पद्धति का जो ज्ञान आयुर्वेद ने इस
विश्व को दिया है, वह अद्वितीय है। अन्य चिकित्सा पद्धतियाँ केवल रोग तक ही सीमित हैं लेकिन
आयुर्वेद ने जीवन के सभी पहलुओं को छुआ है। धर्म, आत्मा, मन, शरीर, कर्म इत्यादि सभी विषय आयुर्वेद के क्षेत्रान्तर्गत में आते हैं।
आयुर्वेद शरीर, मन और आत्मा के संरक्षण के स्वास्थ्य
का एक 'संपूर्ण विज्ञान" है. दुनिया आज
स्वास्थ्य सेवा वितरण में आयुर्वेद की भूमिका को स्वीकार कर लिया है. हर कोई herbals और आयुर्वेद के बारे में
उत्साहित है.






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