मामेकं शरणं व्रज |
प्रार्थनाMar 15 2012
तेरे आँचल में इठलाता
निष्कलंक बचपन है
तुझे देखने को बस मेरा
इक छोटा सा मन है
तेरे उर कैसे लिपटाऊं
इन नन्हें हाथों को
प्रतिपल अर्पण तुमको मेरा
श्रद्धा का क्रंदन है
अंतिम बार फिसलने को हो
जब सांसों की माला
बाहों में भर लेने को तुम
अंतरमन में आना
मेरे मन के अंधतिमिर में
ज्ञान प्रकाश जगाना
निर्मल सुन्दर जीवन पथ पर
हे प्रियतम, ले जाना |
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तेरे आँचल में इठलाता,,
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