दुनिया भर में जब जनवरी की पहली तारीख को नववर्ष के रुप में मनाया जाता है तो क्या कारण है कि हिंदु कैलेंडर के अनुसार 1 अप्रैल को नये साल का स्वागत किया जाता है ? हमने कई बार विक्रम संवत का नाम सुना तो है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारतीय कैलेडर को आखिर विक्रम संवत के नाम से ही क्यों जाना जाता है? और यदि हमारे पास अपना भारतीय पंचाग उपलब्ध है तो, हम अंग्रेजी कैलेडर का प्रयोग क्यों करते है? आइये जानते है इसी तरह के अन्य प्रश्नों के उत्तर जो वक्त-वे-वक्त हमारे मन में कई बार उठते रहते हैं.........


दुनिया में काल-गणना का आधार -

दुनिया भर में यूं तो कई कैलेडर है अलग-अलग सभ्यता के अनुसार अलग-अलग कैलेडर लेकिन फिर भी सभी कैलेंडरो की काल गणना का दो पद्धतियों पर आधारित है – पहली सौर चक्र के अनुसार काल गणना और दूसरी चंद्र चक्र के अनुसार। भारत में सांस्कृतिक विविधता के कारण कई पंचांग प्रचलित है, जिसमें से विक्रम संवत और शक संवत दो सबसे प्रमुख है। शक संवत भारत के राष्ट्रीय कैलेंडर माना गया है।


भारतीय पंचांग में विक्रम संवत का महत्तव -  

शक संवत को भले ही भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर माना गया हो लेकिन भारतीय पंचांग का आधार विक्रम संवत है जिसका सम्बंध राजा विक्रमादित्य के शासन काल से है। ये कैलेंडर विक्रमादित्य के शासनकाल में जारी हुआ था। इसी कारण इसे विक्रम संवत के नाम से जाना जाता है। भारतीय इतिहास में विक्रमादित्य को न्यायप्रिय और जनप्रिय नेता के नाम से जाना जाता है। विक्रमादित्य ने शक्तिशाली शक आक्रांत खरोश को अपनी सेना और प्रजा की सहायता से हराया। इसी विजय को यादगार बनाने के लिये उन्होनें प्रजा के सभी कर्ज माफ किये और एक नए भारतीय कैलेंडर को जारी किया, जिसे विक्रम संवत नाम दिया गया।

 



भारत के दो कैलेंडर “शक संवत” और “ग्रेगोरियन” -

हमारा अपना राष्ट्रीय कैलेंडर शक संवत है, जिसके अनुसार चैत्र नववर्ष का महीना माना जाता है। लेकिन हमारा दूसरा कैलेंडर ग्रेगोरियन को माना गया है जिसको 22 मार्च, 1957 में सभी सरकारी प्रयोजनों के लिए अपनाया गया था। इसी कारण सभी सरकारी छुट्टियां इसी कैलेडर के अनुसार तय की जाती है।

दुनिया भर में आज सबसे ज्यादा ग्रेगोरियन कैलेंडर का प्रयोग होता है। इस कैलेंडर की शुरुआत तेरहवें पोप ग्रेगोरी ने सन 1582 में की थी इसी कारण इसका नाम ग्रेगोरियन कैलेंडर रखा गया। जबकि इससे पहले ब्रिटेन में जूलियन कैलेंडर का प्रयोग होता था जो सौर वर्ष पर आधारित था। वहीं दूसरी तरफ भारतीय कैलेंडर शक संवत सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित है, जिनका प्रयोग धार्मिक तिथि, मुहूर्त, त्योहार के लिये किया जाता है लेकिन आधिकारिक रुप से ग्रगोरियन कैलेंडर का ही प्रयोग किया जाता है।


हिंदु नववर्ष यानि गुड़ी-पड़वा

हिंदी पंचांग के अनुसार मौसम के बदलाव के साथ ही हिंदु नववर्ष का आरंभ होता है जिसे गुड़ी-पड़वा के नाम से जाना जाता है। हिंदु पंचांग के अनुसार चैत्र माह में सर्दियों को अलविदा कहते हुये और वसंत ऋतु के सुहावने मौसम के साथ नये साल का स्वागत किया जाता है। इस दिन सूर्य की उपासना की जाती है क्योकि सूर्य को सृष्टि के सुचारु रुप से चलाने की दिशा में महत्तवपूर्ण स्त्रोत माना गया है। मंदिरों में, घरों में और आफिसों में साफ-सफाई के बाद पूजा करने के पश्चात कार्य आरंभ किया जाता है। इस दिन विशेष रुप से धार्मिक पाठ भी कराये जाते है और प्रसाद बांटा जाता है। पूजा में गर्मी के फलों को ईश्वर को अर्घ्य के रुप में चढ़ाया जाता है। गुड़ी पड़वा के दिन से गर्म पानी से नहाना बंद कर दिया जाता है और आने वाले दिनों में शीतल जल का ही प्रयोग किया जाता है। एक तरह से गुड़ी-पड़वा सर्दियों को विदाई देते हुये सुहावने मौसम और प्रकृति के स्वागत का दिन है जिसे हम सभी गुड़ी-पर्वा के तौर पर मनाते हैं।


 नववर्ष और नवरात्रि का शुभ संगम

चैत्र मास से हमारा नववर्ष आरंभ होता है और नवरात्रि भी इसी माह में आते है जिन्हें चैत्र नवरात्र भी कहा जाता है। वैसे तो, नवरात्र पर्व साल में दो बार आते है पहला आश्विन मास में और दूसरा चैत्र मास में। और सबसे विशेष बात ये है कि इन दोनों ही महीनों में मौसम में परिवर्तन होता है यानि सर्दी और गर्मी का संगम का समय होता है। अश्विन मास में जहां सर्दियों का आगमन होता है, वही चैत्र महीने में गर्मियों की शुरुआत होती है और नये साल की शुरुआत भी। मौसम के बदलाव के साथ ही पूरे वातावरण में बदलाव होता है और इसके साथ ही हमारे शरीर में भी बदलाव होता है। मौसम के इन्ही बदलावों से शरीर को बचाने के लिये नवरात्र के नौ दिनों का व्रत रखा जाता है जिससे शरीर स्वस्थ रहें। नवरात्रि यानि मां दुर्गा की नौ दिनों तक उपासना करना, जिन्हें शक्ति प्रदान करने वाली देवी भी माना गया है अर्थात मौसम के बदलाव के साथ ही उपासना के माध्यम से देवी से नये साल को हर्षोल्लास के साथ मनाने के लिये शक्ति का प्रसाद मांगते हैं।