होली खेलने के लिये सभी की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है..... चाहे स्कूली बच्चे हों या फिर कालेज की यंग जेनरेशन या फिर रोज आफिस की भागमभाग से दो-चार होने वाले मेहनतकशॉ लोग सभी ने रंगों की खरीददारी करने के साथ-साथ गुझियों का जायका लेने की पूरी तैयारी कर ली है। होली पर रंगों के साथ-साथ चारों तरफ गुझियों के रुप में मीठे की भरमार रहेगी लेकिन अगर होली में मिठास ज्यादा हो जायें और चटपटे की बात ना हों तो मजा नहीं आएगा। मीठे के बाद अगर नमकपारे, पापड़, चटपटे गोल-गप्पे, पापड़ी और दही-भल्ले का साथ हो जाये तो होली और भी ज्यादा रंगीन हो जाती है। और इन सबके लिये सबसे ज्यादा मेहनत वाला काम होता है घर की महिलाओं का.... क्योकि होली के स्नैक्स के लिये पापड़ बनाने से लेकर और सुखाने तक का काम बहुत ही मेहनत भर होता है।

होली की नाम ही ऐसा है कि इसे गुझियों की चाशनी के बिना अधूरा ही लगता है.... लेकिन जब मुंह में चाशनी का स्वाद ज्यादा हो जाये तो प्लेट में रखे नमकपारे, करारे पापड़, चटपटे दही-भल्ले के ऊपर सजी हुई दही और उस पर सजी लाल और हरी चटनी का जायकेदार टेस्ट आपके मुंह में पानी लाने के लिये काफी है। वैसे तो गांवों में धूप में चारपाई पर पापड़ सुखाये जाते है लेकिन शहरों की जिंदगी काफी तेज हो गई.... अगर आप इस सारी मेहनत से बचना चाहते हैं या फिर समय की कमी से जूझ रहै हैं तो साबूदाना, आलू, चावल के पापड़ आपको बने बनाये मिल जाते है।

बाजार होली की मिठाईयों और स्नैक्स से भरा पड़ा है... लेकिन घर की
रसोई जब तक खुद के बने पकवानों से ना महके, तब तक त्यौहार की उमंग अधूरी ही रहती
है। भले ही आज जिंदगी काफी भागदौड़ वाली हो गई है लेकिन आज भी अपनी परंपराओं से
जुड़ी महिलायें घर पर ही होली के पकवान बनाती है। होली के नजदीक आते ही छतों पर
पापड़, बेसन के सेव सूखने के साथ गुझियों की मिठास से रसोईयां महकने लगती है और
हमारा भारत तो देश ही ऐसा है जो हर त्यौहार पर खाने-पीने के लिये जाना जाता है।

होली पर छतों पर
चारपाई पर सूखते पापड़ होली वाले दिन जब तलने के बाद थाली में आते है तो कोई भी
इनका लुत्फ उठाये बिना नहीं रह सकता है। नमकपारे, पापड़, बेसन के सेव से भरी थाली
भी अधूरी रहती है जब तक दही-भल्ले के कटोरी साथ में ना हों...... दही-भल्ले,
गोल-गप्पे, पापड़ी के लिये वैसे तो पुरानी दिल्ली काफी मशहूर है लेकिन होली जैसे
त्यौहार पर दही-भल्ले हर घर में बनाये जाते है। मीठा आप ज्यादा नहीं खा सकते है तो
ऐसे में घूम-फिर कर जब आपको चटपटे की तलब लगती है तो दही-भल्ले से बेहतर विकल्प हो
ही नहीं सकता। खूब मस्ती करने के बाद दही-भल्ले में लगा हींग का छौंका, लाल-हरी
चटनी की सजावट आपकी सारी थकावट दूर कर देती है।


तो मीठे की मिठास के
साथ-साथ नमकपारे, दही-भल्ले, गोल-गप्पे के चटपटे जायके के साथ आप सभी की होली
मंगलमय हो।






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